5. धन गुरु अमर दास - धन गुरु राम दास 🙏🙏🙏

धन गुरु अमर दास - धन गुरु राम दास 🙏🙏🙏

थी काया वृद्ध ‘उनकी’, पर मुख पे था तेज महान,
चले थे ‘बाबा’ तीर्थ को, करने गंगा स्नान,
सहम गए कटु शब्द सुन के, कि ‘निगुरे’ की जून बुरी,
चिंता में डूब गए, व्यर्थ तो नहीं गया जीवन कहीं,
सुने जब ‘सतगुर’ के वचन, शांत हुआ मन तभी,
नहीं रहूँगा अब ‘निगुरा’, मिल गई ज्योत ‘नानक’ की,
त्याग के बंधन सारे, ‘खाडूर’ की ओर चल पड़े
वैराग में भरकर टेक दिया माथा, जब पहुँचे ‘सतगुरु’ द्वारे,
कर दिया सम्पूर्ण समर्पण, झोंक दिया ‘सतगुर’ की सेवा में,
‘सतगुर’ की सेवा सफल हुई, ‘सतगुर’ ने दे दिए वर अनंत,
सौंप दी ‘नानक की गद्दी’, बोल उठा सारा ब्रहमंड,
‘धन गुरु अमर दास, धन गुरु अमर दास’,
‘गुर’ ने उचरी ‘बाणी’ ऐसी, डूब गए सभी‘आनंद’ में,
तर गए जीव असंख्य, जब लगे गोइंदवाल में मेले,
‘अपने’ कोमल पगों पर, आ पहुँचे ‘भाई जेठा’,
टिक गया मन ‘उनका’, देख और जान ‘गुरु’ की महिमा,
ऐसा बरसा रस ‘गुर नगरी’ में, 'नाम’ का रंग 'उन्हें' लगा,
रम गए ‘वो’ भक्ति में, रूप बन गए ‘गुरु’ का,
बोल उठे ‘सतगुर’ भी तब, ‘इनके’ जैसा नहीं है दूजा,
आगे बढ़कर ‘सतगुर’ ने, ‘गुर गद्दी’ पे बिठा दिया,
गूँज उठी सभी दिशाएँ, हर्ष से भर गया संसार,
‘धन गुरु राम दास, धन गुरु राम दास’ । ‘तरुण’

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